अब कैंसर के इलाज के दौरान नहीं गिरेंगे बाल

कैंसर के इलाज के लिए वैज्ञानिकों ने खोजा नया तरीका, अब कीमो के दौरान नहीं गिरेंगे बाल

ऐसा इसलिए क्योंकि शोधकर्ताओं ने एक ऐसी खोज की है जिसके तहत किमोथेरेपी के दौरान अब मरीज के बाल नहीं गिरेंगे

ऐसा इसलिए क्योंकि शोधकर्ताओं ने एक ऐसी खोज की है जिसके तहत किमोथेरेपी के दौरान अब मरीज के बाल नहीं गिरेंगे.

कैंसर (cancer) एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनते ही दिमाग सुन्न हो जाता है. किसी को कैंसर हो जाना यानी की उसका मौत के काफी करीब पहुंच जाना. कई लोग इसे लाइलाज बीमारी के नाम से जानते हैं तो कुछ लोग इसे दर्दनाक मौत के रूप में. हालांकि कैंसर के इलाज में मेडिकल साइंस अब काफी आगे आ चुका है. कीमोथेरपी (chemotherapy) और रेडियोथेरेपी (radiotherapy) जैसी तकनीक से इसका इलाज संभव है, लेकिन इनका मरीज के शरीर पर काफी गहरा प्रभाव पड़ता है. कीमो कैंसर के सेल्स को काफी तेजी से खत्म करने का काम करता है. लेकिन इसका साइड इफेक्ट है कि ये बालों को उड़ा देता है. कीमो शुरू होने के कुछ ही हफ्ते बाद बाल झरने शुरू हो जाते हैं. इस दौरान खासकर महिलाओं को सामाजिक और पारिवारिक दबाव का सामना करना पड़ता है.

लेकिन अब ऐसी महिलाएं और पुरुष राहत की सांस ले सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि शोधकर्ताओं ने एक ऐसी खोज की है जिसके तहत किमोथेरेपी के दौरान अब मरीज के बाल नहीं गिरेंगे.

सेंटर फॉर डर्मेटोलॉजी (centre for dermatology) रिसर्च के प्रोफेसर राल्फ पॉस की प्रयोगशाला से हुए अध्ययन में बताया गया है कि कैसे टैक्सेन के कारण बालों के रोम (hair follicide)में होने वाले नुकसान और कैंसर की दवाओं से होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है.

वैज्ञानिकों ने सीडीके 4/6 इनहिबिटर(CDK4/6 inhibitors) नामक दवाओं के एक नए वर्ग के गुणों का अच्छे से अध्ययन किया. ये दवाएं कोशिकाओं के विभाजन को ब्लॉक करती हैं और पहले से ही चिकित्सकीय रूप से तथाकथित ‘टार्गेटेड’ कैंसर थेरेपीज़ के रूप में अनुमोदित हैं.

अध्ययन के प्रमुख लेखकों में से एक डॉ तलवीन पूर्बा ने कहा, ‘हालांकि, पहली बार में यह उलटा लग रहा था, हमने पाया कि सीडीके 4/6 अवरोधकों का उपयोग अस्थायी रूप से बालों के रोम में अतिरिक्त विषाक्त प्रभावों को बढ़ावा देने के बिना सेल डिवीजन को रोकने के लिए किया जा सकता है.’

टैक्सेन (taxanes) क्या हैं

टैक्सेन एक बहुत ही महत्वपूर्ण एंटी-कैंसर ड्रग है जो कि सामान्य तौर पर वैसे मरीज जो ब्रेस्ट या फेफड़ा कैरसिनोमा से पीड़ित हैं उनके इलाज में काम आता है.

सौजन्य:न्यूज 18

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