ई-कॉमर्स कंपनियां देंगी 1.2 करोड़ नौकरियां, सोशल सेक्‍टर में भी होंगी लाखों Jobs!   

नौकरी खोजने वालों के लिए भी खुशखबरी है. ब्रिटेन के सबसे बड़े बैंक और टॉप ब्रॉकरेज फर्म एचएसबीसी की मानें तो अगले 10 साल में ई-कॉमर्स कंपनियां 1.2 करोड़ जॉब देने जा रही हैं. इसके अलावा, सोशल सेक्‍टर से जुड़े प्रोग्राम और स्‍कीम्‍स से भी रोजगार के लाखों अवसर निकलने जा रहे हैं. इससे रोजगार के मोर्चे पर जूझ रही मोदी सरकार को भी बड़ी राहत मिल सकती है.सोशल सेक्‍टर में करने होंगे ये काम
एचएसबीसी ने हालांकि मोदी सरकार को आगाह भी किया है कि सोशल सेक्‍टर में जॉब क्रिएट करने के लिए उसे कई सारे काम करने होंगे. इसमें स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसे मोर्चों पर काफी काम किये जाने की उसने जरूरत जताई है.

मैन्‍युफैक्‍चरिंग व कृषि सेक्‍टर पर फोकस की जरूरत

बैंक ने कहा है कि बड़ी संख्‍या में जॉब क्रिएट करने के लिए सरकार को मैन्‍युफैक्‍चरिंग और कृषि जैसे सेक्‍टर पर भी पर्याप्‍त ध्‍यान देने की जरूरत है. बैंक के अनुसार, भारत की कहानी निर्यात आधारित चीन से अलग होगी. 55 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं का घरेलू उपभोग इसमें महत्वपूर्ण कारक होगा.

तीसरी बड़ी इकोनॉमी होगा भारत
भारत अगले दस साल में जापान और जर्मनी को पछाड़कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. हालांकि इसके लिए लगातार सुधार और स्‍वास्‍थ्‍य तथा शिक्षा जैसे सामाजिक क्षेत्रों पर ध्यान देने की जरूरत है. ब्रिटेन के बैंक एचएसबीसी ने यह उम्मीद जताई है. हालांकि इसके लिए भारत को कई फ्रंट पर कई तरह के इनोवेशन करने होंगे.

Loading…

ग्रोथ के लिए सोशल सेक्‍टर पर फोकस जरूरी
एचएसबीसी ने कहा कि भारत में स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसी चीजों पर कम खर्च किया जा रहा है, जबकि ये खर्च न सिर्फ देश हित में हैं, बल्कि आर्थिक वृद्धि और राजनीतिक स्थिरता के लिए भी जरूरी हैं. भारत को कारोबार आसान करने और इससे संबंधित पहलुओं पर भी काफी ध्यान देने की जरूरत है.आबादी व स्थिरता है सबसे बड़ी ताकत
एचएसबीसी के अर्थशास्त्री ने कहा, ‘‘अगले 10 साल में भारत जर्मनी और जापान को पीछे छोड़कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. खरीद क्षमता के आधार पर यह और पहले हो जाएगा.’’ बैंक ने आबादी और राजनीतिक व सामाजिक स्थिरता को देश की मुख्य ताकत बताया.

7 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी होगा भारत
बैंक के अनुसार, भारत 2028 तक सात हजार अरब यानी 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा. जबकि छह हजार अरब डॉलर के साथ जर्मनी चौथे और पांच हजार अरब डॉलर के साथ जापान पांचवें नंबर पर होगा. वित्त वर्ष 2016-17 में भारत 2300 अरब यानी 2.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था रहा है और विश्व में यह पांचवें स्थान पर काबिज है.

कम रहेगी ग्रोथ रेट इस साल
एचएसबीसी ने कहा कि वित्त वर्ष 2017-18 में आर्थिक वृद्धि दर जीएसटी के कारण वित्त वर्ष 2016-17 के 7.1 प्रतिशत की तुलना में नीचे रहेगी. इसमें अगले साल से लगातार सुधार होता जाएगा. उसने सुधार की प्रक्रिया बंद होने को भी नुकसानदेह बताया.

टैक्‍स की ऊंची दर के कारण छंटनी संभव
जीएसटी का जिक्र करते हुए बैंक ने कहा कि भारत में असंगठित उद्यम काफी संख्या में रोजगार के अवसर मुहैया कराते हैं. वे कर की ऊंची दर के कारण कारखाने बंद या लोगों की छंटनी कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें:

SBI खोल रहा नए तरह का सेविंग अकाउंट, मिनिमम बैलेंस का झंझट नहीं

…तो अब बंद हो जाएंगे 15 सरकारी बैंक, आप पर होगा ये असर

You may also like...

Leave a Reply

%d bloggers like this: