ऋतिक रोशन ने सुपर 30 में 'सुपर' काम किया है!

एक आम-आदमी के रूप में जम रहे हैं 'सुपर 30' के हीरो ऋतिक रोशन!

इस फिल्म में ऋतिक रोशन ने आम आदमी के किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया है और वो अच्छे लगे हैं

सुपर 30 के साथ वापसी कर रहे ऋतिक ने इस फिल्म में कमाल किया है, ये फिल्म आपको भावुक कर देगी

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‘राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा, राजा वही बनेगा जो हकदार होगा’
फिल्म सुपर 30 (Super 30) में बोली गई इस लाइन को आप इस पूरी फिल्म का सार मान सकते हैं. गणितज्ञ आनंद कुमार की ज़िंदगी के संघर्षो पर आधारित इस कहानी के केंद्र में है सुपर 30, गरीब और वंचित बच्चों को IIT जैसे संस्थानों में दाखिला दिलाने की कोशिश करते आनंद के जाबांज संघर्ष की कहानी है जो भारत की ज़मीनी सच्चाई को बदलने की कोशिश करते हैं. ये नए भारत की सच्ची तस्वीर दिखाती कहानी है और निर्माताओं ने इसे दिखाने की पूरी ईमानदारी से कोशिश भी की है.फिल्म किसी छोटे शहर-कस्बे की परीकथा की तरह शुरू होती है. बिहार में एक डाकिए के बेटे कुमार (ऋतिक रोशन) को उसकी गणित की समझ और करिश्माई टैलेंट से दुनियाभर में पहचान मिलती है और कैंब्रिज विश्वविद्यालय में दाखिला भी मिलता है. पर हर परीकथा की तरह आनंद कुमार की कहानी में भी बुरे किरदार हैं जो उनके सपनों को सच होने से पहले ही तोड़ देते हैं. इस फिल्म में आनंद कुमार की इस यात्रा को बखूबी दिखाया गया है.

लेखक संजीव दत्ता कुमार की ज़िंदगी के कुछ खास पहलुओं पर काम करते हुए हम एक जानी पहचानी कहानी से गुज़रते हैं – एक शांत-सीधा-कमज़ोर हीरो जो बेहद विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए विजयी होता है. लेकिन निर्देशक और लेखक की जोड़ी ने इस फिल्म में आनंद की ज़िंदगी को खूबसूरती से दिखाने के साथ- साथ भारत में शिक्षा को घर घर तक पहुंचाने के उनके प्रण को भी सुंदर तरीके से दिखाया है.

छाए ऋतिक

Hrithik Roshan

ऋतिक रोशन और उनके साथी कलाकार इस फिल्म की जान हैं और इसके लिए उनकी प्रशंसा की जानी चाहिए

इस सुंदर कहानी को बिंदु दर बिंदु जोड़ते और पिरोते नज़र आते हैं अभिनेता ऋतिक रोशन और उनके साथ के मंझे हुए कलाकार. मुझे इस बात पर संदेह था कि कैसे ऋतिक रोशन, जो अपनी ‘ग्रीक गॉड लुक्स’ के लिए जाने जाते हैं, इस फिल्म में एक आम आदमी के किरदार को निभाएंगे, लेकिन वो इसे निभा ले गए हैं.

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हालांकि खुद एक बिहारी होने के नाते मैं उनके बोलने के लहजे में कमियां निकाल सकती हूं, लेकिन अधिकांश जगहों पर वो ठीकठाक तरीके से इसे बोलते हैं. हालांकि ऋतिक के साथ मौजूद कास्ट का चयन कमाल का है और वो फिल्म में रचे बसे नज़र आते हैं. पंकज त्रिपाठी अब किसी भी फिल्म में जान डालने का काम करते हैं और यहां भी एक राजनीतिज्ञ के किरदार में वो जम रहे हैं. ऋतिक के साथ मृणाल ठाकुर उनकी प्रेमिका के किरदार में, आदित्य श्रीवास्तव लल्लन सिंह के किरदार में, वीरेंद्र सक्सेना ऋतिक के पिता के किरदार में और ईश्वर और नंदीश संधू उनके भाई के किरदारों में एकदम फिट बैठे हुए लगते हैं.शिक्षा का स्तर
भारत में बेहतर ज़िंदगी पाने के लिए शिक्षा ही एक माध्यम है और ये माध्यम कुछ ही लोगों को उपलब्ध है और इस बात पर ये फिल्म सवाल भी उठाती है. फिल्म का एक खास दृश्य है. जब कुमार की क्लास से आए बच्चे अंग्रेज़ी कोचिंग संस्थानों के बच्चों का सामना करते हैं. इस गाने को आप बिना फिल्म के भी देखेंगे तो आपके रोंगटे खड़े हो सकते हैं.

निर्देशक विकास बहल के पास ऋतिक रोशन जैसा सुपरस्टार मौजूद था लेकिन वो फिल्म को वास्तविकता के करीब रखते हैं और ज़िंदगी में चीज़ें जैसे सामने आती हैं वैसे ही उन्हें दिखाते हैं. फिल्म के कई दृश्य ऐसे हैं जो आपको बॉलीवुड के फिल्मी हीरोपन से बाहर लाकर खड़ा कर देंगे और ये देखना एक सुखद अहसास है.

ये भी पढ़ें – ऋतिक रोशन की फिल्म देखकर क्या बोलीं फराह खान?

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी:
स्क्रिनप्ल:
डायरेक्शन:
संगीत:

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First published: July 11, 2019, 5:30 PM IST

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