कार, मकान गिफ्ट करने वाले सावजी कभी कमाते थे 200 रुपये, ऐसे खड़ा किया करोड़ों का एंपायर

कर्मचारियों को लेकर अलग नजरिया-कर्मचारियों को लेकर उनका नजरिया भी अलग है. उनका कहना है कि उनकी काशिश होती है कि कर्मचारी से ऐसे काम लिया जाए, ऐसी सैलरी दी जाए, जिससे वह खुशी के साथ काम करे. उनका मानना है कर्मचारी खुश होने पर काम पर ज्यादा केंद्रित होता है और कंपनी को प्रॉफिट दिलाने के लिए दिन-रात मेहनत करता है. ढोलकिया के मुताबिक, वह अपने कर्मचारियों वही अनुभव कराते हैं जो उन्होंने अपनी मां से सीखा था. उनकी मां का कहना था कि अच्छा आदमी बनना. इतना ही नहीं सावजी की कोशिश होती है कि वह अपने कर्मचारी के साथ ऐसा व्यवहार करें, जैसा अपने बेटे से करते हैं और शायद यही वजह है कि वो आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं.

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