क्या नींद की कमी से परीक्षा परिणामों पर खराब प्रभाव पड़ता है?

यह बात हम सभी जानते हैं कि बच्चों के ग्रोथ में शारीरिक व्यायाम एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. व्यायाम से शारीरिक और न्यूरोबायोलॉजिकल विकास में मदद मिलती है. ठीक उसी तरह, नींद भी बेहतर अकेडमिक प्रदर्शन और बेहतर इमोशन मैनेजमेंट के साथ सीधे तौर पर जुड़ी हुई है. जो बच्चे रात में अच्छी नींद नहीं पूरी करते उन्हें अगले दिन स्कूल के असाइनमेंट या टेस्ट में अधिक संघर्ष करना पड़ता है. वे बहुत अधिक थके हुए होते हैं और उनमें ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम हो जाती है. चिकित्सकीय रूप से भी, वे एडेनोइड, टॉन्सिल या अस्थमा जैसी बीमारियों के चपेट में आ जाते हैं.

परीक्षा के वक्त कुछ छात्र लंबे समय तक जागने के लिए कैफीन, एनर्जी ड्रिंक या अन्य उत्तेजक पदार्थों का उपयोग करते हैं. यह आपकी नसों को थोड़े वक्त के लिए स्फूर्ति से तो भर देता है लेकिन वास्तव में, लंबे समय तक ऐसा करने से इसका दुष्प्रभाव नज़र आने लगता है. इसके अलावा, नींद की कमी आपको मूड स्विंग का शिकार और चिड़चिड़ा बना सकती है.

डॉक्टरों का भी मानना है कि जो बच्चे परीक्षा के एक दिन पहले रातभर जगकर पढ़ते हैं, वो अगले दिन पेपर के वक्त पूरी तरह ब्लैंक हो जाते हैं.

बच्चों (1-3 वर्ष) के लिए हर दिन 12-14 घंटे सोना स्वस्थ के हिसाब से सही है. वहीं प्रीस्कूलर के लिए, यह 11-13 घंटे है. छोटे बच्चों (5-10 वर्ष) को 10-11 घंटे और किशोरों (10-17 वर्ष) को 8.5-9 घंटे की नींद की आवश्यकता होती है. बेशक, समय-समय पर आवश्यकता बदल सकती है.

क्या है नींद का महत्व?

– एक अच्छी नींद हमारे शरीर में मौजूद सेल्स के विकास को बढ़ावा देती है. इससे आपके शरीर में बेहतर रिपेयर होती है और एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली का निर्माण होता है.

– पूरे दिनभर हमारे दिमाग में कई जंक मेमोरी इकट्ठा हो जाती हैं. ऐसे में हमारे ब्रेन की यह जिम्मेदारी है कि वह जंक मेमोरीज को साफ कर के रोजाना बनने वाली नई यादें यानी मेमोरीज़ के लिए जगह खाली रखे.

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– हमारे मस्तिष्क का एक भाग आक्रामकता (aggression) को नियंत्रित करता है. इस भाग को एमिग्डाला के रूप में जाना जाता है. जब आप सोते हैं, तो एमिग्डाला में होने वाली गतिविधि दब जाती है. इसलिए अपने गुस्से को काबू में रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में नींद जरूरी है.

– नींद की कमी आपके शरीर में इंसुलिन के स्तर को प्रभावित करती है और इंसुलिन प्रतिरोध की स्थिति की ओर ले जाती है, जिससे डायबिटीज विकसित होने का खतरा अधिक होता है.

– वो लोग जो रात में देर तक जगते हैं, उन्हें मध्यरात्रि भूख लग जाती है. भूख में वो कार्बोहाइड्रेड और फैट युक्त खाना खाते हैं, जिससे उनके शरीर का मोटापा बढ़ जाता है.

– देर रात सोने से आंखों के नीच डार्क सर्कल्स तो आ ही जाते हैं. चेहरे पर दाग-धब्बों की शिकायत भी बढ़ जाती है.

कैसे सेट करें अपने बच्चों का बेडटाइम रूटीन

– बच्चों को एक समय पर रोजाना सोने की आदत डलवाएं

– अपने बच्चे के रूम को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखें. ध्यान रखें कि उनका बेड और तकिया आरामदायक हो.

– बच्चे के रूम में नाइट लैंप या डिम लाइट भी मैजूद हो. ताकि सोते वक्त कमरे में हल्कि रोशनी रहे.

– रात के डिनर में बहुत हेवी खाना नहीं खिलाएं. रात का खाना हल्का ही होना चाहिए.

– सोते वक्त दूध दें. साथ ही सुबह-सुबह रोज व्यायाम क
करने की आदत डलवाएं.

सौजन्य:न्यूज 18

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