'जजमेंटल है क्या' समीक्षाः कंगना ने एक्टिंग से खींची नई लकीर

'जजमेंटल है क्या' फिल्म समीक्षाः कंगना ने दमदार एक्टिंग से खींची नई लकीर

जजमेंटल है क्या की समीक्षा.

Judgementall Hai Kya film review: कंगना रनौत के अभिनय में दिन-ब-दिन निखार आता जा रहा है. जजमेंटल है क्या में उन्होंने एक अपने प्रदर्शन से एक नई लकीर खींच दी है.

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बॉबी से मिलिए, एक ऐसी बच्ची जो अपने माता-पिता को आपस में लड़ते-झगड़ते देखती है. लेकिन दुनिया से इसके बारे में कुछ नहीं कहती है. वह जानती है, हर बाद इसके बारे में सोचने पर उसका दिल बुरी तरह से दुखेगा. उसका पूरा बचपन इसी जद्दोजहज में गुजर जाता है. लेकिन अक्सर ऐसी परिस्थितियों में बड़े हुए बच्चों की मानसिक ‌स्थिति सामान्य नहीं रह जाती. बॉबी के साथ भी ऐसा ही होता है. उसके दिमाग में यह बात घर कर जाती है कि पुरुष और महिला के रिश्ते में सबकुछ ठीक नहीं होता.

एक ऐसी लड़की के किरदार में कंगना रनौत ने कमाल का अभिनय किया है. बतौर मुख्य अभिनेत्री बचपन से ट्रमुआ झेलना और मानसिक तौर असंतुलित लड़की के किरदार से दर्शकों बांधे रहना आसान काम नहीं है. किसी ऐसे शख्स को देखते वक्त आम तौर पर दर्शक उबने लगता है. लेकिन कंगना ने अपनी कमाल की एक्टिंग के बूते लगातार बांधे रखा है.

लेख‌िका और निर्देशक ने किया है कमाल
लेखिका कनिका ढिल्लन और निर्देशक प्रकाश कोवेलामुड़ी पर्दे पर एक कहानी को कहने का जबर्दस्त तरीका अपनाया है. इनकी फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ पुराने तौर-तरीकों वाली फॉमूर्ला फिल्म नहीं है. इसमें अचानक कुछ ऐसा नहीं घटता जो फिल्म के कथानक पर असर डालता हो और ना ही कहानी परांपरागत तरीके से आगे बढ़ती है. फिल्म में नयेपन के साथ तथ्यों को संगत तरीके से बिठाया गया है.

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जजमेंटल है क्या की समीक्षा.

‘जजमेंटल है क्या’ में दिखेगा लेयर के अंदर लेयर
फिल्म में कंगना के बर्ताव को समझने के लिए लेखिका ढिल्लन ने कहानी में कई बेहद रोमांचक सीन लिखे हैं. एक के बाद एक कहानी की परतें खुलती हैं. इन्हें देखकर कई बार फिल्म की मुख्य किरदार बॉबी पर सहानुभति आने लगती है और सबको समझ आता है कि वो क्यों ऐसा बर्ताव कर रही है. लेकिन साथ ही दर्शकों के मन में यह पशोपेश भी बना रहेगा कि बॉबी जो कर रही है वो ठीक है या नहीं?

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दूसरे हिस्से में थोड़ी धीमी होती है गति, लेकिन बचा लेते राजकुमार राव
लेकिखा ढिल्लन और निर्देशक प्रकाश ने एक कसी हुई फिल्म बनाने की पूरी कोशिश की है. लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म रामलीला के चक्कर में धीमी हो गई है. लेकिन क्लाइमेक्स तक आते-आते राजकुमार राव अपना कमाल दिखा देते हैं. दूसरे हिस्से में राजकुमार राव, कंगना को चुनौती देते हुए फिल्म में छा जाते है. केशव के किरदार में राजकुमार राव एक मर्डर केस में फंसी शख्‍सियत को पर्दे पर उतारते हैं. कहानी में एक मोड़ ऐसा भी आता है जहां बॉबी और केशव एक दूसरे करीब आते हैं. लेकिन यह करीबी दोनों को फबती नहीं.

सपोर्ट‌िंग एक्टर्स ने किया है कमाल का काम
फिल्म में कंगना के ब्वॉयफ्रेंड के किरदार में हुसैन दलाल ने दर्शकों को थोड़ा हंसाने और आराम देने की कोशिश की है. क्योंकि कंगना और राजकुमार राव के किरदार बेहद चौंकाने वाले हैं. लेकिन अमृता पुरी, अमयरा दस्तूर, ब्रीजेंद्र काला, जिमी शेरगिल और सतीश कौशिक ने लोगों के लिए थोड़ी-थोड़ी हंसी के मौके बनाए रखे हैं, जो इस फिल्म को बेहद शानदार बना देते हैं.

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प्रोड्यूसर एकता कपूर की भी करनी होगी तारीफ
सही कहें तो ‘जजमेंटल है क्या’ एक ऐसी स्टोरीलाइन वाली फिल्म है, जिसे सुनते समय शायद ही कोई निर्माता इसमें पैसे लगाने को तैयार हो. दो ऐसे प्रमुख अभिनेताओं की कहानी जो पहले से मानसिक असंतुलन से गुजर रहे हैं, बाद में मर्डर मिस्ट्री में फंस जाते हैं. यही नहीं, दोनों के दिगाम में क्या चल रहा है, इसका कोई अंदाजा नहीं लगा सकता, मर्डर-सस्पेंस होने के बाद भी फिल्म में कॉमेडी है. इस तरह की कहानियों में निर्माताओं की दिलचस्पी कम ही होती है. लेकिन एक बार फिर से निर्माता एकता कपूर ने अपनी क्रिएटिव बुद्ध‌ि का परिचय दिया है और एक शानदार फिल्म पर्दे पर आने पर कामयाब हो सकी है.

फाइनल कमेंट
जो दर्शक सिनेमा में एडवेंचर ढूंढ़ते हैं, ‘जजमेंटल है क्या’ निश्चित तौर उन्हें थिएटर जाकर देखनी चाहिए.

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी:
स्क्रिनप्ल:
डायरेक्शन:
संगीत:

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First published: July 26, 2019, 6:58 PM IST

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