महिलाओं के मुकाबले पुरुष अधिक संख्या में करते हैं आत्महत्या

World Suicide Prevention Day 2019: महिलाओं के मुकाबले पुरुष अधिक संख्या में करते हैं आत्महत्या

WHO के अनुसार, औसतन लगभग 3000 लोग प्रतिदिन आत्महत्या (Suicide) के कारण मरते हैं. और हर रोज 20 या उससे अधिक लोग अपने जीवन को समाप्त करने का प्रयास करते हैं.

WHO के अनुसार, औसतन लगभग 3000 लोग प्रतिदिन आत्महत्या (Suicide) के कारण मरते हैं. और हर रोज 20 या उससे अधिक लोग अपने जीवन को समाप्त करने का प्रयास करते हैं.

World Suicide Prevention Day 2019 : अभी कल ही की तो बात है, यूपी के भदोही जिले में कक्षा-3 की एक छात्रा ने खुद को स्कूल के टॉयलेट में मिट्टी का तेल (कैरोसिन) डाल कर आग के हवाले कर लिया. कक्षा-3 में पढ़ने वाली उस छात्रा की उम्र क्या रही होगी? 8 से 9 साल. इस छोटी सी उम्र में बच्ची ने आत्महत्या करने की कोशिश की. ऐसे ही रोज अमूमन हर वर्ग के लोग आत्महत्या के अंधेरे कुएं में अपनी जान गंवा रहे हैं. पूरी दुनिया में आत्महत्या की घटनाओं में तेजी देखी गई है. हर साल दुनिया भर में करीब 8 लाख लोग आत्महत्या कर रहे हैं. वहीं भारत में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन नेटवर्क ऑन सुइसाइड रिसर्च एंड प्रिवेंशन के मुताबिक हर साल 2.3 लाख लोग आत्महत्या करते हैं.

जागरूकता के लिए आयोजित किए जाते हैं कई कार्यक्रम
यही कारण है कि हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के रूप में मनाया जाता है. आत्महत्याओं को रोकने के लिए दुनिया भर में हो रहे काम को बढ़ावा देने के लिए इस दिन विभिन्न आयोजन और गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, ताकि यह जागरूकता बढ़ाई जा सके कि आत्महत्या समय से पहले होने वाली मृत्यु का एक प्रमुख कारण है.

हर साल आत्महत्या करके मर जाते हैं एक मिलियन लोग

WHO के अनुसार, औसतन लगभग 3000 लोग प्रतिदिन आत्महत्या के कारण मरते हैं. और हर रोज 20 या उससे अधिक लोग अपने जीवन को समाप्त करने का प्रयास करते हैं. हर साल लगभग एक मिलियन लोग आत्महत्या करके मर जाते हैं. विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पहली बार 2003 में शुरू किया गया था और इसे 10 सितंबर को एक आईएएसपी पहल के रूप में आयोजित किया गया था और यह आयोजन डब्ल्यूएचओ द्वारा सह-प्रायोजित है.

पुरुषों में आत्महत्या के मामले अधिक
आंकड़े बताते है कि भारत में पुरुषों में आत्महत्या करने के मामले अधिक पाए गए हैं. एनसीआरबी के अनुसार 2015 में 91,528 पुरुषों ने अपनी जान ली, वहीं, 2005 और 2010 में क्रमश: 66,032 और 87,180 पुरुषों ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली. इन 15 वर्षों में महिलाओं में भी सुइसाइड करने के केस में मामूली बढ़ोतरी देखी गई.

सौजन्य:न्यूज 18

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