शादीशुदा लोगों में कम होता है डिमेंशिया का खतरा: अध्ययन

शादीशुदा लोगों में कम होता है डिमेंशिया का खतरा: अध्ययन

अध्ययन में पाया गया कि तलाकशुदा पुरुषों में तलाकशुदा महिलाओं की तुलना में अधिक नुकसान देखने को मिलता है

अध्ययन में पाया गया कि तलाकशुदा पुरुषों में तलाकशुदा महिलाओं की तुलना में अधिक नुकसान देखने को मिलता है

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 एक नए अध्ययन में पाया गया है कि शादीशुदा लोगों में उम्र बढ़ने के साथ मनोभ्रंश यानी की डिमेंशिया की संभावना कम होती है. दूसरी ओर, तलाकशुदा लोग शादीशुदा लोगों की तुलना में डिमेंशिया के शिकार अधिक होते हैं. अध्ययन में पाया गया कि तलाकशुदा पुरुषों में तलाकशुदा महिलाओं की तुलना में अधिक नुकसान देखने को मिलता है.

मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हुई लियू ने कहा, ‘अमेरिका में अविवाहित वृद्ध वयस्कों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ऐसे में यह शोध अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है. शादी में एक लंबे समय के बाद जटिलताएं आ जाती हैं. लेकिन डिमेंशिया के मामले में तमाम जटिलताओं के बावजूद यह बचाव कारक के रूप में जाना जाता है.

द जर्नल्स ऑफ जेरोन्टोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक शोधकर्ताओं ने 2000-2014 तक स्वास्थ्य और सेवानिवृत्ति अध्ययन से राष्ट्रीय-प्रतिनिधि डेटा का विश्लेषण किया. रिसर्चर्स ने 52 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 15,000 से अधिक उत्तरदाताओं का विश्लेषण किया और हर दो साल में उनके संज्ञानात्मक कार्य को मापा.

उन्होंने उन 52 लोगों को 4 कैटेगरी में बांटा- तलाकशुदा या अलग हो चुके, जिन्होंने कभी शादी ही नहीं की और जो शादीशुदा हैं. इन सभी में तलाकशुदा लोगों में सबसे अधिक डिमेंशिया का खतरा पाया गया.

डिमेंशिया किसी खास बीमारी का नाम नहीं है बल्कि ये कुछ ऐसे लक्षणों के समुह का नाम है जिसकी वजह से यादाश्त में कमी (Memory Loss) जैसे लक्षण दिन प्रति दिन की जिंदगी में साफ दिखाई पड़ता है . डिमेंशिया के कई प्रकार हैं और इससे पीड़ित 60 से 80 फीसदी मरीजों में अल्जाइमर नामक बीमारी देखी जाती है.

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First published: August 31, 2019, 4:31 PM IST

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