हफ्ते में 2 बार खाएं नट्स, कम होगा हार्ट अटैक का खतरा: स्टडी

हफ्ते में 2 बार खाएं नट्स, कम होगा हार्ट अटैक का खतरा: स्टडी

study says eating nuts twice a week lowers heart attack risk

आधुनिक रोजमर्रा की आपाधापी भरी जिंदगी ने लोगों के स्वास्थ्य को बेहद प्रभावित किया है. नौजवान से लेकर बुजुर्ग तक सभी विभिन्न बीमारियों कि चपेट में हैं.

हफ्ते में दो बार निर्धारित मात्रा में नट्स का सेवन आपके दिल को मजबूत बनाता है और हार्ट अटैक के खतरे को 17 प्रतिशत तक कम कर देता. ईरान के इस्फ़हान कार्डियोवैस्कुलर रिसर्च (Isfahan Cardiovascular Research Institute)के एक शोध में यह बात सामने आई है.

आधुनिक रोजमर्रा की आपाधापी भरी जिंदगी ने लोगों के स्वास्थ्य को बेहद प्रभावित किया है. नौजवान से लेकर बुजुर्ग तक सभी विभिन्न बीमारियों कि चपेट में हैं. ह्रदय रोग कि समस्या आज आम है. हार्ट अटैक से मरने वालों कि संख्या में आये दिन इजाफ़ा होता जा रहा है. ऐसे में ईरान के Isfahan Cardiovascular Research Institute अपने एक शोध के जरिये इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि अगर सप्ताह में कम से कम दो बार एक निश्चित मात्रा में ड्राईफ्रूट्स (नट्स) का सेवन किया जाए तो हार्ट अटैक के खतरे को 17 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है.

Isfahan Cardiovascular Research Institute के शोधकर्ता नौसीन मोहम्मादिफर्द (Noushin Mohammadifard) का कहना है कि नट्स में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, मिनिरल्स, विटामिन, फाइबर, फाइटोस्टेरॉल और पॉलीफेनोल मौजूद होते हैं जो हृदय को स्वस्थ और सेहतमंद रखते हैं और गुड कैलेस्ट्रोल को संतुलित करते हैं, जिसके चलते हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है. हालांकि यूरोपीय और अमेरिकी अध्ययनों में भी इस तरह शोध हुए हैं लेकिन अभी पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में इस तरह के बहुत सीमित रिसर्च हुए हैं.

आमतौर पर बहुत से लोग कैलोरी और वजन बढ़ने के डर से नट्स पसंद होने के बावजूद इसे कम ही खाते हैं. लेकिन एक अमेरिकी संस्था के अध्ययन के मुताबिक अखरोट में जितनी कैलोरी बताई हुई हैं उससे भी 21 प्रतिशत कम कैलोरी इसमें पाई जाती है. ‘जनरल ऑफ न्यूट्रीशिन’ में प्रकाशित हुआ एक अध्ययन इसकी पुष्टि करता है. इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता डॉ डेविड जे बेयर थे जो यूएसडीएम में सीनियर साइंटिस्ट हैं. इस अध्ययन में यह पाया गया है कि एक अखरोट (28.35 ग्राम) में 146 कैलोरी होती है.डॉ नौसीन अपन शोध को उसी दिशा में एक कदम आगे बता रहे हैं. यह रिसर्च 35 वर्ष से अधिक आयु के शहरी और ग्रामीण इलाकों के कुल 5,432 व्यस्क लोगों पर किया गया था जिसमें यह परिणाम सामने आया.

सौजन्य: न्यूज 18 हिन्दी

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