Blank Movie Review: सनी देओल की मौजूदगी में भी 'ब्लैंक' रह गई फिल्म

Blank Movie Review: सनी देओल की मौजूदगी में भी 'ब्लैंक' रह गई फिल्म

फिल्म रिव्यू : ब्लैंक

सनी देओल जब भी स्क्रीन पर आते हैं, मज़ा आता है लेकिन वो पूरी फिल्म का भार अपने कंधो पर नहीं उठा सकते थे, हीरो को भी कुछ करना था।

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इस शुक्रवार रिलीज हुई एक्शन और थ्रिलर फिल्म ब्लैंक, एक ऐसे लड़के (हनीफ) की कहानी है जो जिहादियों के लिए एक मानव बम बनकर काम कर रहा है. जिससे ये साफ समझ आ जाता है कि उसका मकसद सिर्फ और सिर्फ इंडिया में ब्लास्ट कर के तबाही मचाना है, लेकिन एक एक्सीडेंट में वो अपनी याददाश्त खो बैठता है.जहां इस किरदार को निभाकर एक्ट्रेस डिंपल कपाड़िया के भतीजे और अक्षय कुमार के साले साहब करन कपाड़िया (हनीफ) बॉलीवुड में अपना डेब्यू का रहे हैं. वहीं फिल्म में एस एस दीवान (सनी देओल) ATS चीफ के तौर पर एक ईमानदार पुलिस वाले हैं. जोकि सच्चाई और वफ़ादारी के मामले में किसी को भी नहीं बख्शता है फिर चाहे वो खुद ही क्यों ना हो.

फिल्म में मानव बम बनकर आया हनीफ एक सड़क हादसे का शिकार हो जाता है. जिसके बाद उसे एक हॉस्पिटल में पहुंचाया जाता है और वहां इलाज के दौरान डॉक्टर्स पाते हैं कि हनीफ के दिल के साथ एक टाइम बम जुड़ा हुआ है. जिसे देखते ही डॉक्टर्स एटीएस चीफ दीवान को खबर देते हैं. डॉक्टर्स के लिए हनीफ के दिल से जुड़ा वो टाइम बम निकालना बेहद मुश्किल है.

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वहीं एक्सीडेंट की वजह से हनीफ अपनी यादाश्त खो बैठता है. और उस यह नहीं पता होता है कि वो आतंकवादी है. वहीं सनी देओल के लिए भी यह बहुत मुश्किल हो जाता है क्योंकि हनीफ के दिल से जुड़ा बम उसकी धड़कन की टाइमिंग पर सेट है ऐसे में अगर हनीफ की धड़कन रुकी तो एक बड़ा ब्लास्ट हो जाएगा जिससे कि मुंबई में चारों तरफ बड़ी तबाही नज़र आएगी. ऐसे में दीवान समझ जाते हैं कि मुंबई पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है.

फिल्म में सनी देओल का किरदार पुराने समय से चले आ रहे एक रुढ़िवादी तरीके को दर्शाता है. मुंबई में मंडरा रहे इस बड़े खतरे से सनी अपनी एक छोटी सी रिवॉल्वर लेकर एक 90 के दशक के हीरो की तरह लड़ने निकल पड़ते हैं जहां उनके सामने आतंकियों के हाथों में बड़ी बड़ी बंदूके होती हैं.

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फिल्म के कई सीन्स में सनी देओल काफी जमे लेकिन वो अपना जादू बरक़रार नहीं रख सके. वहीं उनके सामने करन कपाड़िया की एक्टिंग काफी ज्यादा हावी होती नज़र आयी. ऐसा मालूम ही नहीं पड़ता है कि ये करन की डेब्यू फिल्म है.

वहीं खम्बता के निर्देशन की बात करें तो उनके निर्देशन में ऐसा महसूस होता है कि फिल्म, टीवी शो CID से काफी मेल खाती है. ऐसे में वीकेंड पर फिल्म देखने का प्लान बनाने वाले लोग हिंदी सिनेमा की जगह दूसरे सप्ताह में भी जगह बनाए रखने वाली फिल्म एवेंजर्स एंडगेम को देखना ज्यादा पसंद कर रहे हैं.

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डिटेल्ड रेटिंग

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First published: May 4, 2019, 5:19 PM IST

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