Kalank Review: कपड़े और सेट पर खूब हुआ खर्च, परफॉर्मेंस हैं दमदार

Kalank Review: कपड़े और सेट पर खूब हुआ खर्च, परफॉर्मेंस हैं दमदार

कलंक फिल्म रिव्यू

भव्य सेट, भारी भरकम कास्ट और एक दिलचस्प कहानी के बावजूद फिल्म अपना प्रभाव नहीं छोड़ पाती।

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अभिषेक वर्मन की फिल्म ‘कलंक’ का सभी को इंतज़ार था. हालांकि इस फिल्म को समीक्षकों ने मिले जुले रिव्यू दिए लेकिन इसके बाद भी फिल्म को देखने कई लोग पहुंचे. मैंने इस फिल्म को सुबह नहीं देखा और जब दोपहर में इसे देखने की कोशिश की तो फिल्म के किसी भी शो का टिकट नहीं मिला. इससे साफ हो गया है कि इस फिल्म को पहले वीकेंड पर अच्छा फ़ायदा होने वाला है.बंटवारे से पहले की इस प्रेम कहानी के केंद्र में हैं रूप (आलिया भट्ट) और ज़फ़र (वरुण धवन) जो यश चोपड़ा की ‘वक़्त’ की तरह ऐतिहासिक घटनाओं की पृष्ठभूमि पर एक परिवार की कहानी को कहती है. बस इस बार टार्गेट ऑडियंस आज की यंग ऑडियंस को रखा गया है.

पाकिस्तान के शहर लाहौर के पास हुस्नाबाद (काल्पनिक शहर) में मौजूद है एक लुहार ‘ज़फ़र’ जो बहार बेग़म (माधुरी दीक्षित) और बलराज चौधरी (संजय दत्त) का नाजायज़ बेटा है और कहानी है ज़फ़र और रुप के प्यार की कहानी है.

लव जिहाद के आरोप पर आलिया की सफ़ाई

रूप एक गरीब संगीतकार की बेटी है और उसकी शादी एक अखबार के मालिक देव चौधरी (आदित्य रॉय कपूर) से होने वाली है. देव पहले से शादीशुदा है, लेकिन कैंसर से पीड़ित उसकी पत्नी सत्या (सोनाक्षी सिन्हा) खुद रूप से गुज़ारिश करती है कि वो (रुप) देव की दूसरी पत्नी के तौर पर आ जाए. रूप इसे मान लेती है लेकिन खुद को एक अजीब रिश्ते में पाती है.

ज़फ़र का एकमात्र उद्देश्य है बलराज के परिवार से बदला लेना और अब रूप के ज़रिए वो इस बदले को पूरा करना चाहता है और बलराज के नाम को मिट्टी में मिलाना चाहता है. शिबानी भतीजा की इस कहानी में काफी संभावनाएं मौजूद हैं और इस फिल्म में इन संभावनाओं को उभारने की कोशिश भी की गई है. लेकिन फिल्म का स्क्रीनप्ले इस लंबी चौड़ी कास्ट को प्रभावित नहीं करने देता.

फिल्म में बहुत सारा समय आलिया की सुंदरता और वरुण की बॉडी दिखाने पर लगा दिया गया है. फिल्म के निर्माता करन जौहर ने एक बार मज़ाक में कहा था कि कलंक के निर्देशक अभिषेक बर्मन को आलिया पर क्रश है और अब इस फिल्म को देख कर ऐसा लगता है कि अभिषेक को सच में आलिया से प्यार है क्योंकि इस फिल्म में आलिया के अनगिनत क्लोज़ अप शॉट हैं.

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इस फिल्म में माधुरी अपनी छोटी सी भूमिका में बहुत प्रभावित करती हैं. वो एक बेटे की ज़िद्द और सही और गलत के बीच कहीं फंसी हैं और भले ही वो स्क्रीन पर बहुत कम नज़र आती हैं, अपनी छाप छोड़ जाती हैं. आदित्य इस फिल्म में 2 साल बाद नज़र आए और अपने काम से वो प्रभावित करते हैं. इसके अलावा अन्य सपोर्टिंग कास्ट ने भी अपना काम बेहतरी से किया है.आलिया और वरुण धवन के बीच कमाल की केमिस्ट्री है और वो पर्दे पर दिखती भी है. हर फिल्म के साथ ये दोनों कलाकार पहले से बेहतर होते जा रहे हैं और इस फिल्म में भी प्रभावित करते हैं. इस फिल्म के सेट और स्क्रीन को देख कर आपको संजय लीला भंसाली की फिल्मों की भव्यता याद आ जाएगी. इस पारिवारिक ड्रामा को अभिषेक वर्मन ने आज के हिसाब से बांधने की कोशिश की है और वो कुछ हद तक सफल भी हुए हैं.

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डिटेल्ड रेटिंग

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First published: April 18, 2019, 9:00 AM IST

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