Kesari Film review : अक्षय कुमार के इस पीरियड ड्रामा में ‘दम’ है और अक्षय कहां किसी से कम हैं!

Kesari Film review : अक्षय कुमार के इस पीरियड ड्रामा में ‘दम’ है और अक्षय कहां किसी से कम हैं!

केसरी में अक्षय कुमार

केसरी अक्षय कुमार (Akshay Kumar) की बेहतरीन फिल्मों में से एक मानी जाएगी। इस फिल्म को उनकी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में भी गिना जाएगा।

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अक्षय कुमार की फिल्म केसरी का ट्रेलर ने ही इस फिल्म के लिए एक पृष्ठभूमि तैयार कर दी थी. अक्षय कुमार कहते हैं – बाहर कम से कम दस हजार हैं और हम 21. इस डॉयलॉग ने ही सेट कर दिया था कि फिल्म का मूड क्या होना वाला है. ये उतना ही मुश्किल काम था जितना इस फिल्म के लेखक अनुराग सिंह और गिरीश कोहली के लिए सारागढ़ी की लड़ाई की कहानी को एक फिल्म के पैमाने में कैद करना था.1897 की सारागढ़ी युद्ध की सच्ची कहानियों पर आधारित इस फिल्म की कहानी सारागढ़ी के किले में फंसे उन 21 जांबाज़ो की कहानी है जिन्होंने अपने कर्म के लिए हज़ारों पश्तून लड़ाकों से लोहा लिया था.

इस बात का पता फिल्म की शुरुआत में ही लग जाता है कि इस मुश्किल परिस्थिति का अंत सुखद नहीं होने वाला है. फिल्म लिखने वाली जोड़ी के सामने ये मुश्किल थी की कैसे दर्शकों को अंत तक स्क्रीन से बांधे रखें और वो इसमें कामयाब होते हैं



ऐसा कहने के मेरे पास दो कारण हैं – पहला ये कि जब मैं अक्षय की इस फिल्म का स्पेशल शो देखने गई तो वहां पर अक्षय कुमार के देशभर से आए फैन मौजूद थे और वो इस फिल्म को देखकर खुश थे.

दूसरा इस फिल्म का अंत मालूम होते हुए भी जब मैं सिनेमा से निकली तो मैं एंटरटेन्ड महसूस कर रही थी और यही बात इस फिल्म के पक्ष में जाती है.

फिल्म का मुख्य किरदार हवलदार ईशर सिंह (अक्षय कुमार) ब्रिटिश सेना का एक वफादार सिपाही है और एक बहादुर लड़ाका है. लेकिन उसकी हिम्मत उसे अक्सर मुसीबतों के बीच ला खड़ा कर देती है. वो मुसीबत में फंसी एक लड़की को बचाता है लेकिन ऐसा करने से पठानों की दुश्मनी मोल लेता है. ऐसे में ईशर सिंह के सीनियर, जो उससे भारतीय होने के कारण भेदभाव भी रखते हैं, उसे एक ऐसी जगह भेज देते हैं जहां वो किसी को प्रभावित नहीं कर सकता था.

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लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था. ईशर सिंह के इस पोस्ट पर आने के कुछ ही समय में अफगान लड़ाके सारागढ़ी की इस पोस्ट पर हमला कर देते हैं ताकि वो गुलिस्तां और लॉकहार्ट नाम के दो किलों पर कब्ज़ा कर लें.

यहां लेखकों के लिए मुश्किल ये थी कि भारतीय वीर सिपाहियों को सिर्फ ब्रिटिश हुकूमत का प्यादा दिखाना इस फिल्म को नुकसान पहुंचा सकता था. लेकिन इन 21 जवानों की बहादुरी को इतनी खूबसूरती से पर्दे पर उकेरा गया है कि ये सारी बातें पीछे रह जाती हैं. इसके अलावा एक कट्टर दुश्मन को दिखा कर लेखकों ने दर्शकों को अपने सिपाहियों के साथ कर दिया.

निर्देशक अनुराग सिंह को पंजाबी इतिहास और लोक कहानियों की अच्छी समझ है. उन 21 वीरों के किरदारों को खूबसूरती से गढ़ा गया है और हर किरदार का कहानी को आगे बढ़ाने में खास योगदान है. वो आपको पसंद आने लगते हैं और जब वो गिरते हैं तो कहीं आपका दिल टूटता है. इन जवानों के परिवार की कहानी को बेवजह नहीं खींचा गया है और इससे फिल्म का क्लाईमैक्स और बढ़िया बन गया है. लेकिन इन नई फिल्मों में एक कमी हमेशा महसूस होती है और वो है भावनाओँ की कमी. हालांकि केसरी कुछ हद तक आपको भावुक करती है पर कहानी को फास्ट पेस रखा गया है. फिल्म की कहानी में एक बंजर रेगिस्तान है लेकिन थिएटर की स्क्रीन पर तेज़ भागती, जबर्दस्त एक्शन वाली ये फिल्म आपको पसंद आती है.

अक्षय कुमार अपने रोल को आसानी से निभा जाते हैं. वो एक ही साथ शांत, कठोर, मज़ाकिया, भावुक और जांबाज़ हैं और इन सारे भावों को अपने किरदार में ले आते हैं. कुछ दिनों पहले बॉलीवुड के बिज़नेस एक्सपर्ट्स से बात करते हुए मैंने पूछा था कि उनके हिसाब से ‘केसरी’ का हाल बॉक्स ऑफिस पर कैसा रहने वाला है और उन्होंने कहा था कि ये फिल्म हिट होगी. लेकिन मैं थोड़ा सा समीक्षक की सीमा से आगे निकल कर कहना चाहूंगी की न सिर्फ ये फिल्म अक्षय की बेहतरीन फिल्मों में से एक मानी जाएगी. इस फिल्म को उनकी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में भी गिना जाएगा

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी:
स्क्रिनप्ल:
डायरेक्शन:
संगीत:

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First published: March 22, 2019, 4:40 PM IST

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