Movie Review: 'बदला' में आपको फिर से दिखेगी क्राइम और सस्पेंस की जबर्दस्त कहानी

Movie Review: 'बदला' में आपको फिर से दिखेगी क्राइम और सस्पेंस की जबर्दस्त कहानी

बदला मूवी रिव्यू

अमिताभ और तापसी की जोड़ी ने इस फिल्म में भी वैसा ही कमाल किया है जैसा वो ‘पिंक’ में करते हैं। जबर्दस्त सस्पेंस वाली इस कहानी को एक बार ज़रूर देखें।

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बदला कहानी है एक तफ्तीश की और संक्षेप में कहें तो पूरी फिल्म इस बात के आस पास घूमती है कि ‘क्राइम किसने किया?’ अर्जुन नाम का एक आदमी एक होटल के कमरे में मृत पाया जाता है और उसकी गुप्त प्रेमिका नैना सेठी, जो उस समय उसके साथ थी इस ‘हत्या’ की दोषी मानी जाती है. फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ती है हमे पता चलता है कि क्यों, कौन, कैसे अर्जुन को मार कर चला गया है.एक स्पैनिश फिल्म ‘दि इनविज़िबल गेस्ट’ का आधिकारिक रीमेक है ये फिल्म लेकिन इसमें इसके लीड किरदारों को बदल दिया गया है. नैना सेठी (तापसी पन्नू) और बादल गुप्ता (अमिताभ बच्चन) के कंधो पर ये फिल्म टिकी है और दोनों के एंगल से कहानी चलती रहती है.

अमिताभ बच्चन को इस तरह के किरदार निभाने में अब महारत हासिल है लेकिन इस फिल्म में वो आपको चौंका देते हैं. वो अपने किरदार में कहीं भी ओवर नहीं होते. सधे हुए संवाद, शांत एक्सप्रेशन वो इस रोल में एकदम सही मात्रा में उतर आए हैं और यही उनकी कद्दावर क्षमता का परिचायक है.

अमिताभ बच्चन के सामने अभिनय करना एक पुराने मंझे हुए कलाकार के लिए भी मुश्किल हो सकता है लेकिन तापसी अपनी छाप छोड़ देती हैं. पिंक में दोनों एक दूसरे के साथ काम कर चुके हैं और शायद इससे तापसी को मदद भी मिली हो लेकिन इस फिल्म में वो पहले से ज्यादा मंझी हुई नज़र आती हैं. वो हर फिल्म के साथ बेहतर होती जा रही हैं और आने वाले समय की एक जबर्दस्त अभिनेत्री वो होंगी.

सुजॉय घोष और राज वसंत ने स्क्रीनप्ले और सवांदो को लिया है लेकिन फिल्म के हिसाब से उनमें ज़रुरी बदलाव किए हैं और वो प्रभावी बन पड़ा है. बार बार बदलता कथानक आपको सीट से बांधे रखता है और फिल्म में कई बार आपको चौंकाने वाले दृश्य सामने आते हैं. कहानी के बाद घोष को थ्रिल फिल्मों का चैंपियन माना जा रहा था और वो बदला में भी निराश नहीं करते.

इस फिल्म की कहानी को थोड़ा भी बताना फिल्म के साथ नाइंसाफी होगी. इस फिल्म को बॉलीवुड मसालों से दूर रखा गया है और ये इसे दिलचस्प बनाती है. फिल्म की कई परतें हैं जो एक दूसरे के साथ मिली हुई हैं और दर्शकों को उलझाती नहीं है.

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फिल्म का एक मात्र मिसिंग पीस है सुजॉय का ट्रेडमार्क लोकल कनेक्ट. कहानी और कहानी 2 में उन्होंने फिल्म के साथ साथ उस जगह को भी स्थापित किया था जहां घटनाएं घट रहीं थी लेकिन इस बार वो ऐसा नहीं कर पाते हैं और शायद इसका कारण विदेशी फिल्म से कहानी को उठाना था.इस फिल्म के सवांद बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वो दो अहम किरदारों के बीच कहानी को बनाते हैं और घोष और वसंत ने इस पर अच्छा काम किया है. मोनिषा बाल्डवाना ने फिल्म का अच्छा संपादन किया है और इसे बेवजह खिंचने से बचाया है. कुल मिलाकर ये फिल्म आपको देखनी चाहिए क्योंकि ये फिल्म अपने नाम के साथ इंसाफ करती है.

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डिटेल्ड रेटिंग

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First published: March 8, 2019, 4:32 PM IST

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