VIDEO: इन दोस्तों ने अपने गांव को बनाया स्मार्ट, अब इसी के जरिये कर रहे कमाई

रजनीश बाजपेयी और योगेश साहू ने उत्तर प्रदेश के जिला रायबरेली में स्थित गांव तौधकपुर को स्मार्ट बना दिया है. इस गांव में सीसीटीवी कैमरे और वाई-फाई जोन भी है. आइए जानें इसके बारे में…

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उत्तर प्रदेश में रायबरेली के पास बसा एक छोटा सा गांव तौधकपुर कोई आम गांव नहीं है. यहां हर वो चीज है जो शायद हर गांव में होनी चाहिए पर आम तौर पर मिलती नहीं. नागरिकों को गांव में बुनियादी जरूरतों के साथ-साथ प्राथमिक स्कूल, नियमित रूप से हेल्थचेक अप, 18-20 घंटे की बिजली मिलती है. गांव की सड़कें बिलकुल साफ-सुथरी हैं, जगह-जगह पर कूड़े दान हैं, स्ट्रीट लाइट्स हैं. सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं और तो और यहां वाई-फाई जोन भी है, जो तोधकपुर को स्मार्ट गांव बनाता हैं.रजनीश-योगेश का स्मार्ट गांव ऐप- तौधकपुर का हुलिया रजनीश बाजपेयी और योगेश साहू ने बदला है. ये दोनों ईटी प्रोफेशनल हैं. इन दोनों ने अपने काम में सफल और काफी व्यस्त हैं, लेकिन इनकी जड़े मजबूती से अपने अपने गांवों में गड़ी है. इनके जहन में हमेशा ये ख्याल रहा की देश के हर नागरिक को अपने हक और प्रगति के लिए जरुरी विकल्प और साधन मिलने चाहिए.(ये भी पढ़ें-मामूली फीस देकर बनें मॉडर्न टीचर, 3 घंटे पढ़ाकर कमाएं 40 हजार/महीना)

रजनीश बाजपेयी

ऐप ने बदली गांव की किस्मत- तौधकपुर गांव में जो विकास के काम दिख रहे हैं, ये ऐप के जरिए ही हुआ है. जैसे कई सुविधाएं सरकारी योजनाओं के जरीए पूरी की है. सरकार द्वारा दी जाने वाली सभी स्कीम्स की जानकारी ऐप पर होती है, गांव के लोग यहां अपनी जरूरत के हिसाब से स्कीम में आवदेन कर सकते हैं, जिसे प्रधान सेवक से सरकारी माध्यमों तक जोड़ा जाता है. इन विकस कामों के लिए स्मार्ट गांव की टीम भी पूरा सहयोग करती है. (ये भी पढ़ें- 24 साल की उम्र में बना सिविल ठेकेदार, आमदनी 1 लाख/महीना)

गांव तौधकपुर

ऐसे करते हैं कमाई- अपने प्रोफेशनल स्किल्स को इस्तेमाल में लाकर रजनीश और योगेश ने स्मार्ट गांव ऐप शुरू किया. उन्होंने अपने कारोबार को इस तरह ढाला की कमाई के साथ साथ विकास को भी इससे जोड़ा जा सके. इस पूरे कॉन्सेप्ट का रेवेन्यू जनरेटींग हिस्सा है, ग्राममार्ट जिसपर किसानों को अपने उपज का सही मूल्य मिलता है. (ये भी पढ़ें- 5 लाख में शुरू करें पेपर बैग की यूनिट, हर महीने 1 लाख रुपए तक इनकम)

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इसके अलावा इस ऐप में कई बड़े फिचर्स हैं, जो किसानों को मदद करते हैं. फाउंडर्स का मानना है कि इस प्लेटफॉर्म को कामयाब बनाने के लिए किसानों को हर तरह से सक्षम बनाना जरूरी है, इसीलिए उन्हें सोशली कनेक्ट करने की हर मुमकीन कोशिश ऐप के जरिए की जा रही है.

ऐप पर खर्च हुए 20-22 लाख रुपये- फाउंडर्स ने स्मार्ट गांव ऐप बनाने के लिए करीब 20-22 लाख का खर्च किया इसके अलावा एक आदर्श गांव को स्मार्ट गांव बनाने के लिए  25-30 लाख का खर्च आता है जो शुरूआती दौर में फाउंडर्स, चैरीटी और वेलफेयर स्कीम्स से जुटाए गए. (ये भी पढ़ें-पापड़ बिजनेस से करें मोटी कमाई, सरकार करेगी लाखों रुपए की मदद)

कंपनी अगले दो साल में 10 गांवों को स्मार्ट बनाने पर काम कर रही है. ग्रामीण इलाकों में इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की जागरुकता फैलाने के साथ साथ शहरी लोग, कॉरपोरेट्स और एनआईआई का सपोर्ट फाउंडर्स के लिए काफी अहम है. साथ ही, ग्रामिण विकास से जुड़े बाकी स्टार्टअप की सुविधाएं इस प्लेटफॉर्म से जोड़कर रजनीश और योगेश स्मार्ट भारत का सपना पूरा करने की ओर बढ़ रहे है.

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First published: July 10, 2018, 7:19 AM IST

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