VIDEO: देश के टॉप-10 अमीरों की लिस्ट में शामिल हुआ ये निवेशक

एक रात में आपकी कुल संपत्ति डबल हो जाए…यह सुनकर आपको एक लॉटरी के टिकट पर बड़े इनाम जीतने जैसा लग रहा होगा. लेकिन ऐसा ही कुछ राधाकिशन दमानी के साथ हुआ. महज 24 घंटे में उनकी संपत्ति 100 फीसदी बढ़ गई… इन बातों को सुनकर आपने मन में यह सवाल भी उठा होगा कि आखिर यह शख्स कौन है और कैसे इनकी संपत्ति डबल हो गई थी. आइए जानते हैं इनके बारे में…

एक रात में डबल हो गई थी संपत्ति- 20 मार्च 2017 तक राधाकिशन दमानी सिर्फ एक रिटेल कंपनी के मालिक थे, लेकिन 21 मार्च को सुबह जैसे उन्होंने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) की घंटी बजाई वैसे ही उनकी संपत्ति 100 फीसदी तक बढ़ गई.

ये हुआ कैसे: 20 मार्च दिन सोमवार तक राधाकिशन दमानी सिर्फ एक रिटेल कंपनी के मालिक भर थे, लेकिन 21 मार्च की सुबह जब उनकी कंपनी का आईपीओ शेयर बाजार में लिस्ट हुआ उनकी संपत्ति, गोदरेज परिवार और राहुल बजाज से भी ज्यादा हो गई है. डीमार्ट का शेयर 604.40 रुपए पर लिस्ट हुआ, जबकि इश्यू प्राइस 299 रुपये रखा गया था. यह 102 फीसदी का रिटर्न है. पिछले 13 साल में लिस्टिंग के दिन किसी शेयर की कीमत में इतनी बढ़ोतरी नहीं हुई थी.

अब शामिल हुए टॉप-5 अमीरों की लिस्ट में: राधाकिशन दमानी की एक साल में दौलत 75 हजार करोड़ रुपए बढ़ी है. फोर्ब्स रियल टाइम रैंकिंग में दमानी 1207 करोड़ डॉलर नेटवर्थ के साथ देश के 5वें अमीर शख्स हैं.


दमानी की ज्रिक अब क्यों-21 मार्च को डी-मार्ट की लिस्टिंग हुई थी, उस दौरान शेयर का भाव 604 रुपए था.इस भाव पर कंपनी की कुल दौलत 37,694.70 करोड़ रुपए थी. लिस्टिंग के बाद से डीमार्ट का शेयर 152.33 फीसदी बढ़कर 1619.95 रुपए हो चुका है. इस भाव पर कंपनी की दौलत बढ़कर 1,01,098.56 करोड़ रुपए हो गई है. यानी 63,403.86 करोड़ रुपए कंपनी की दौलत बढ़ गई.सोमवार के कारोबार के दौरान कंपनी का स्टॉक अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जिससे कंपनी की मार्केट कैप 1 लाख करोड़ रुपए के पार हो गई. मार्केट कैप में बढ़ोत्तरी के साथ यह कंपनी एफएमसीजी की दिग्गज नेस्ले, गोदरेज कंज्यूमर, डाबर और ब्रिटानिया जैसी कंपनियों से बड़ी बन गई,

86,360 करोड़ हुई फैमिली की दौलत –फोर्ब्स की लिस्ट के अनुसार दमानी की खुद की दौलत जिसमें फैमिली भी शामिल है, बढ़कर 86 हजार करोड़ रुपए हो गई है. जुलाई 2016 में दमानी की दौलत 9,281 करोड़ रुपए थी. जो जून 2018 में बढ़कर 86,360 करोड़ रुपए (1270 करोड़ डॉलर) हो गई है.

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सुर्खियों से दूर रहना: राधाकिशन दमानी हमेशा सुर्खियों से दूर रहते हैं. वह हमेशा सफेद कपड़े पहनते हैं और शेयर बाजार के दिग्गज निवेशकों के बीच ‘मिस्टर वाइट एंड वाइट’ के नाम से मशहूर हैं. उन्होंने 1999 में रिटेल बिजनस शुरू किया था, ये वो वक्त था जब कुमार मंगलम बिड़ला और फ्यूचर ग्रुप के किशोर बियानी के कदम इस सेक्टर में आए भी नहीं थे.

 लंबी अवधि के निवेश पर नजर रखना: दुनिया के सबसे बड़े निवेशक वारेन बफे की ही तरह दमानी भी एक वैल्यू इन्वेस्टर हैं जो लंबी अवधि के निवेश पर दूरदृष्टि रखते हैं. वो जब उद्यमी बने थे, तब भी उन्होंने अपना यह नजरिया बरकरार रखा और उन्होंने बिना किसी शार्टकट का इस्तेमाल किए डी-मार्ट का निर्माण किया.

छोटे से शुरुआत: दमानी ने छोटे से शुरुआत की और विस्तार के लिए कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई. छोटे स्तर के कारण ही उन्हें सप्लाई चेन पर नियंत्रण करने में आसानी रही और वो शुरुआत से ही मुनाफे में ध्यान केंद्रित कर पाए. अपने अस्तित्व के15 साल में डी-मार्ट ने प्रत्येक वर्ष लाभ कमाया है.

 अपने लोगों को अहमियत देने की खूबी: दमानी ने अपना बिजनेस अपना बाजार की फ्रेंचाइजी लेकर शुरु किया. उस वक्त से ही उन्होंने विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं के साथ निजी संबंधों का निर्माण करना शुरू कर दिया था. उन्होंने दोनों को तवज्जो दी और उन्होंने इन दोनों को कभी भी हतोत्साहित नहीं होने दिया और उनके स्टोर्स में आउट ऑफ स्टॉक वाली स्थिति कभी नहीं आई.

 सस्ता खरीदो, कम कीमत पर बेचो: दमानी यह बात अच्छे से जानते हैं कि वो क्या कर रहे हैं. वो भारी छूट पर दैनिक उपयोग के उत्पाद उपभोक्ता को पेश करते हैं. उनके काम करने के तरीकों में से एक यह है कि वो आपूर्तिकर्ताओं और विक्रेताओं को भुगतान एक दिन के भीतर करने की कोशिश करते हैं, जबकि इंडस्ट्री के नॉर्म्स के मुताबिक यह अवधि करीब एक हफ्ते की है. शुरुआती भुगतान के कारण ये लोग इन्हें माल सस्ती दर पर उपलब्ध करवाते हैं.

क्रेडिट से बचें: खुदरा व्यापार में क्रेडिट और देरी से भुगतान जोखिम भरा है, क्योंकि वो बुरी तरह से आपकी आपूर्ति और लागत को प्रभावित कर सकते हैं. दमानी क्रेडिट से दूरी रखते हैं और कोशिश करते हैं कि वो अपने आपूर्तिकर्ताओं की अपेक्षा मुताबिक जल्द से जल्द भुगतान कर दें

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